
केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह का आगरा दौरा

नई दिल्ली/आगरा, 20 मार्च 2026। केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने शुक्रवार को आगरा के प्रसिद्ध कारपेट क्लस्टर का दौरा कर हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की जमीनी स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला की समीक्षा करते हुए बुनकरों, निर्यातकों और अन्य हितधारकों से सीधे संवाद स्थापित किया।
दौरे के दौरान मंत्री ने विभिन्न प्रकार के करघों का निरीक्षण किया और पारंपरिक कालीन बुनाई की बारीकियों को समझा। उन्होंने कारीगरों से बातचीत कर उत्पादन प्रक्रिया, कच्चे माल की उपलब्धता, बाजार की मांग, निर्यात से जुड़ी चुनौतियों और उनकी आजीविका से संबंधित मुद्दों की जानकारी ली। मंत्री ने उत्पादन एवं उत्पादन-उपरांत व्यवस्थाओं—जैसे फिनिशिंग, पैकेजिंग और निर्यात तंत्र—का भी विस्तृत आकलन किया।
आगरा के कालीन उद्योग की सराहना करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि यह क्षेत्र अपनी समृद्ध परंपरा, उत्कृष्ट कारीगरी और जटिल डिजाइनों के लिए देश-विदेश में विशेष पहचान रखता है। यहां निर्मित हस्तनिर्मित कालीन न केवल भारतीय कला और शिल्प का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हैं।
उन्होंने कहा कि कालीन उद्योग एक श्रम-प्रधान क्षेत्र है, जो बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान करता है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में। “यह उद्योग न केवल कारीगरों की आजीविका को सुदृढ़ करता है, बल्कि देश की निर्यात अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है,” उन्होंने कहा। मंत्री ने उद्योग को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने, तकनीकी उन्नयन, डिज़ाइन नवाचार और बाजार विस्तार पर विशेष जोर दिया।
इस अवसर पर Carpet Export Promotion Council (CEPC) के चेयरमैन मुकेश कुमार गोम्बर, कार्यकारी निदेशक (प्रभारी) डॉ. स्मिता नागरकोटी, डायमंड कारपेट्स के ललित जैन, CEPC के पूर्व COA सदस्य आर.डी. शर्मा, श्रीराम कारपेट्स के बलबीर शरण गोयल तथा बंधेजिया ब्रदर्स के अनुप गुप्ता सहित कई प्रमुख उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने मंत्री के साथ उद्योग की वर्तमान स्थिति, निर्यात संभावनाओं और सुधार की दिशा में आवश्यक कदमों पर विस्तृत चर्चा की।
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने सरकार से निर्यात प्रोत्साहन, कारीगरों के लिए प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार, कच्चे माल की सुलभता और वैश्विक बाजार में भारतीय कालीनों के ब्रांडिंग को मजबूत करने की मांग रखी। मंत्री ने इन सुझावों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया कि सरकार कालीन उद्योग के समग्र विकास के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
यह दौरा सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत हस्तनिर्मित कालीन क्षेत्र को सुदृढ़ कर निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने, कारीगरों को सशक्त बनाने और ग्रामीण रोजगार के अवसरों का विस्तार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।










