नई दिल्ली।
भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है और देश में भी कच्चे तेल का उत्पादन होता है। इसके बावजूद भारत को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में विदेशों से तेल आयात करना पड़ता है। इसके पीछे मुख्य कारण देश में उत्पादन और खपत के बीच बड़ा अंतर है।
भारत में प्रतिदिन लगभग 30 से 35 लाख बैरल कच्चे तेल की खपत होती है, जबकि घरेलू उत्पादन करीब 6 से 7 लाख बैरल प्रतिदिन के आसपास ही है। यानी देश की कुल जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ता है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार भारत में तेल के भंडार सीमित हैं और अधिकांश पुराने तेल क्षेत्र अब कम उत्पादन दे रहे हैं। ऐसे में बढ़ती आबादी, उद्योगों का विस्तार और वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि के कारण तेल की मांग तेजी से बढ़ रही है।
भारत मुख्य रूप से मध्य-पूर्व के देशों जैसे Saudi Arabia, Iraq, United Arab Emirates के अलावा Russia और United States से भी कच्चा तेल आयात करता है। सस्ता और स्थिर सप्लाई मिलने के कारण इन देशों से तेल खरीदना भारत के लिए व्यावहारिक विकल्प माना जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि देश में तेल की खोज और उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। साथ ही सौर ऊर्जा, जैव ईंधन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देकर तेल पर निर्भरता कम करने की रणनीति भी अपनाई जा रही है।
निष्कर्ष:
हालांकि भारत में तेल का उत्पादन होता है, लेकिन घरेलू जरूरतों के मुकाबले यह काफी कम है। यही कारण है कि देश को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करना पड़ता है।