Home / Politics / मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: ईरान और कतर के गैस ठिकानों पर हमलों से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: ईरान और कतर के गैस ठिकानों पर हमलों से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा

लेखक✍️ राजेश जायसवाल पत्रकार जोश सच का

 

नई दिल्ली/दोहा/तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। क्षेत्र के अहम ऊर्जा केंद्रों पर हुए ताजा हमलों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, ईरान के सबसे बड़े गैस ठिकानों में से एक पर हमले के बाद अब कतर के गैस उत्पादन से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द काबू में नहीं आए, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बेहद गंभीर हो सकता है। आर्थिक मामलों के जानकारों के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आने से तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल संभव है, जिससे महंगाई बढ़ेगी और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा।

कतर दुनिया के प्रमुख एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में वहां के गैस ठिकानों पर हमले से यूरोप, एशिया और अन्य क्षेत्रों में गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है। वहीं ईरान के गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला पहले ही बाजार में अनिश्चितता पैदा कर चुका है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी और कोविड-19 महामारी के दौरान आए संकट से भी ज्यादा गंभीर रूप ले सकते हैं। यदि सप्लाई चेन बाधित होती है और ऊर्जा की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो उद्योगों पर असर पड़ेगा, उत्पादन घटेगा और रोजगार पर भी खतरा बढ़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताई है और शांति बनाए रखने की अपील की है। कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने के प्रयास तेज हो गए हैं, लेकिन जमीनी स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद अहम होंगे। यदि समय रहते हालात नियंत्रित नहीं किए गए, तो इसका असर सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, निवेश और वित्तीय बाजारों पर भी व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *