मंत्री जी देते रहे भाषण, औराई में ‘नारी शक्ति’ ने दिखाया बाहर का रास्ता; खाली कुर्सियों ने किया अपमान का हिसाब!
भदोही (इंद्र यादव) उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के औराई ब्लॉक से आज एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। ‘नारी शक्ति सम्मेलन’ में महिलाओं के सम्मान की बात करने पहुंचे यूपी के कैबिनेट मंत्री एके शर्मा को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब उनके भाषण के बीच में ही सैकड़ों महिलाएं उठकर बाहर चली गईं। देखते ही देखते पूरा सभागार खाली हो गया और मंत्री जी कुर्सियों को संबोधित करते रह गए।
गर्मी, इंतज़ार और फिर ‘अपमान’ का तड़का
इस हंगामे के पीछे की कहानी भीषण गर्मी और लंबे इंतज़ार से शुरू हुई। सम्मेलन में बुलाई गईं महिलाएं घंटों से मंत्री जी के आने की राह देख रही थीं। जब मंत्री जी मंच पर आए, तो महिलाओं को उम्मीद थी कि उनकी समस्याओं या सम्मान की बात होगी, लेकिन मंत्री जी के लंबे भाषण ने तपती गर्मी में उनके धैर्य की परीक्षा लेनी शुरू कर दी।
विधायक दीनानाथ भास्कर की ‘अनदेखी’ पड़ी भारी
सभागार खाली होने की असली वजह केवल देरी नहीं, बल्कि स्थानीय विधायक दीनानाथ भास्कर के प्रति दिखाई गई कथित बेरुखी रही।
दीनानाथ भास्कर औराई के कद्दावर नेता हैं, 4 बार के विधायक रहे हैं और पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं।
स्थानीय महिलाओं का आरोप था कि मंच पर उनके चहेते नेता और विधानसभा की संयुक्त समिति के सभापति भास्कर जी को वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।
अपने नेता की अनदेखी देख ‘नारी शक्ति’ का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने सामूहिक रूप से सभा का बहिष्कार कर दिया।
“अपमान बर्दाश्त नहीं”: महिलाओं ने साफ संदेश दिया कि अगर उनके नेता का सम्मान नहीं होगा, तो वे भी ऐसे किसी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनेंगी जहाँ केवल भाषणों की औपचारिकता हो।
सिर्फ दो दर्जन महिलाओं ने बचाई ‘लाज’
जब सैकड़ों महिलाएं नारेबाजी करते हुए बाहर निकल गईं, तब पार्टी की निष्ठा से बंधी केवल 25-30 महिलाएं ही अंत तक बैठी रहीं। बाकी पूरा हॉल खाली पड़ा रहा, जो कार्यक्रम की सफलता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर गया।
नतीजा: एक कड़ा राजनीतिक संदेश
महिलाओं के अधिकारों की बात करने आए मंत्री जी के सामने औराई की महिलाओं ने खुद स्टैंड लेकर यह साबित कर दिया कि वे अब केवल भीड़ का हिस्सा नहीं हैं। विधायक दीनानाथ भास्कर के समर्थन में खाली हुई इन कुर्सियों ने साफ कर दिया है कि स्थानीय राजनीति में जमीनी पकड़ और सम्मान की अहमियत भाषणों से कहीं ज्यादा बड़ी है।









