छोटी बकाया पर कट रही बिजली, जवाबदेही पर उठे सवाल; विपक्ष ने सरकार को घेरा
भदोही/वाराणसी।
स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर प्रदेश में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। हालांकि, जिन उपभोक्ताओं के घरों में पहले से स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, वे अब भी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
जनता और विभिन्न राजनीतिक दलों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था में उपभोक्ताओं के अधिकारों और सुविधा की पर्याप्त सुरक्षा नहीं की गई है।
⚡ छोटी राशि, तुरंत सप्लाई बाधित
कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि यदि उनका बैलेंस ₹100–₹200 जैसी मामूली राशि भी नेगेटिव हो जाता है, तो तुरंत बिजली सप्लाई बाधित कर दी जाती है।
आरोप है कि पहले से स्पष्ट चेतावनी या पर्याप्त नोटिस नहीं दिया जाता।
पहले की पारंपरिक बिलिंग व्यवस्था में हर बिल पर डिस्कनेक्शन तिथि अंकित रहती थी। अब अधिकांश उपभोक्ताओं को न तो मैन्युअल बिल मिल रहा है और न ही हर व्यक्ति स्मार्टफोन का उपयोग करता है, जिससे डिजिटल अलर्ट सभी तक नहीं पहुंच पा रहे।
विभागीय फॉल्ट पर जवाबदेही कहाँ?
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब ट्रांसफॉर्मर खराब होता है, लाइन टूटती है या अन्य तकनीकी कारणों से घंटों या पूरी रात बिजली गायब रहती है, तब विभाग पर कोई दंडात्मक व्यवस्था नहीं दिखती।
उपभोक्ताओं का सवाल है—जब भुगतान में देरी पर तत्काल कार्रवाई हो सकती है, तो सेवा में देरी पर विभाग की जवाबदेही क्यों तय नहीं होती?
राजनीतिक घमासान तेज
विभिन्न विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को जनविरोधी नीति बताते हुए सरकार पर हमला बोला है। उनका कहना है कि तकनीकी सुधार के नाम पर आम जनता पर दबाव बनाया जा रहा है।
वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि स्मार्ट मीटर पारदर्शिता, सही बिलिंग और राजस्व सुधार के लिए जरूरी हैं। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से बिजली चोरी रुकेगी और उपभोक्ताओं को वास्तविक खपत के अनुसार भुगतान करना होगा।
प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों और उपभोक्ता संगठनों ने निम्न मांगें रखी हैं—
₹1000–₹3000 तक की ग्रेस लिमिट तय की जाए।
सप्लाई काटने से पहले 3 से 15 दिन का स्पष्ट नोटिस अनिवार्य हो।
SMS, कॉल और ऑफलाइन नोटिस की व्यवस्था लागू हो।
तय समय में बिजली बहाल न होने पर मुआवज़ा नीति (SLA) लागू की जाए।
उपभोक्ता और विभाग—दोनों के लिए समान जवाबदेही तय हो।
रोक के बावजूद असमंजस
नए मीटर लगाने पर रोक से फिलहाल स्थिति शांत करने की कोशिश की गई है, लेकिन जिन घरों में स्मार्ट मीटर पहले से लगे हैं, वे अब भी तत्काल कटौती और तकनीकी खामियों की शिकायत कर रहे हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या सरकार इस व्यवस्था में आवश्यक सुधार और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करेगी, या विवाद और बढ़ेगा?
स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से आधुनिक कदम है, लेकिन इसे लागू करने में संतुलन, पारदर्शिता और संवेदनशीलता जरूरी है।
जनता का कहना है कि तकनीक तभी स्वीकार्य होगी, जब वह न्यायपूर्ण और समावेशी हो—और जब जवाबदेही दोनों तरफ़ समान रूप से तय हो।










