सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का निधन, 74 वर्ष की उम्र में PGI लखनऊ में ली अंतिम सांस; राजनीतिक जगत में शोक की लहर
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख स्तंभ, पूर्व नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोविंद चौधरी का 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में भर्ती थे, जहां इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से समाजवादी पार्टी सहित पूरे राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर दौड़ गई है।
PGI में चल रहा था इलाज
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के चलते उन्हें PGI लखनऊ के आईसीयू (ICU) में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी कर रही थी, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और अंततः उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ जननेता बनने का सफर
बलिया जिले के बांसडीह/चिलकहर क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले रामगोविंद चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। चंद्रशेखर जी के समाजवादी विचारों से प्रभावित होकर वे समाजवादी आंदोलन से जुड़े।
वे कई बार विधायक चुने गए और उत्तर प्रदेश विधानसभा में एक प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते थे।
वर्ष 2017 से 2022 के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
सपा सरकार के दौरान वे कैबिनेट मंत्री भी रहे और बेसिक शिक्षा तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार जैसे प्रमुख विभागों का कार्यभार संभाला।
राजनीतिक गलियारे में गहरा शोक
रामगोविंद चौधरी के निधन पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, पार्टी नेताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गजों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। नेताओं ने उनके निधन को समाजवादी आंदोलन और उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।
पार्टी समर्थकों और शुभचिंतकों का लखनऊ स्थित आवास और उनके गृह जनपदीय क्षेत्र बलिया में जुटना शुरू हो गया है, जहां उनके अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं।










