कलेक्ट्रेट में गूंजी जनता की आवाज: ‘लापरवाही की तो खैर नहीं’— जनसुनवाई में अधिकारियों को सख्त निर्देश!
संवाददाता विशाल सिंह वाराणसी
जिला कलेक्ट्रेट में आज का माहौल बाकी दिनों से जुदा था। सुबह से ही अपनी फरियाद लेकर पहुंचे आमजन की उम्मीदों को उस वक्त नया बल मिला, जब जनसुनवाई के दौरान फरियादियों की एक-एक समस्या को न केवल गंभीरता से सुना गया, बल्कि उनके त्वरित और स्थाई समाधान का रोडमैप भी मौके पर ही तैयार कर दिया गया।
समस्याओं पर सीधा प्रहार, मौके पर ही दिए सख्त निर्देश
जनसुनवाई कक्ष में एक-एक कर पहुंचे ग्रामीणों और शहरवासियों ने अपनी-अपनी समस्याएं सामने रखीं। कहीं जमीन पर अवैध कब्जे की टीस थी, कहीं पेंशन में देरी का दर्द, तो कहीं पेयजल और बिजली विभाग की ढिलाई से जुड़ी शिकायतें। हर एक शिकायत पर गहरा संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागाध्यक्षों को सीधे कटघरे में खड़ा किया गया।
मौके पर मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट और दोटूक लहजे में हिदायत दी गई:
समयबद्ध निस्तारण: हर शिकायत की एक समय-सीमा (Deadline) तय हो। फाइल दबाकर बैठने का दौर अब खत्म हो चुका है।
गुणवत्ता और पारदर्शिता: निस्तारण सिर्फ कागजों पर खानापूर्ति न हो, बल्कि धरातल पर फरियादी को न्याय महसूस होना चाहिए। निस्तारण से पीड़ित की संतुष्टि अनिवार्य है।
जीरो टॉलरेंस पॉलिसी: जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर पाई गई ढिलाई, लापरवाही या हीला-हवाली पर सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है।
’हर नागरिक की समस्या का समाधान हमारी प्राथमिकता’
बैठक के दौरान यह संदेश पूरी तरह साफ कर दिया गया कि शासन की मंशा आम जनता को सुलभ और पारदर्शी न्याय दिलाना है। अधिकारी अपने दफ्तरों का रवैया बदलें और जनता के प्रति अधिक संवेदनशील बनें।
जनसुनवाई के बाद फरियादियों के चेहरों पर एक नया विश्वास देखने को मिला। कई बुजुर्गों और महिलाओं ने जिला प्रशासन के इस सख्त और संवेदनशील रुख की खुले दिल से सराहना की।
कलेक्ट्रेट से निकला यह कड़ा संदेश अब पूरे प्रशासनिक अमले में चर्चा का विषय बना हुआ है—काम में कोताही नहीं चलेगी, समाधान ही एकमात्र विकल्प है!









