बी.एड. सत्र 2026–28 के उद्घाटन समारोह में शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षक-निर्माण पर दिया गया जोर –डॉक्टर शैलेश कुमार
नवादा, बिहार।
नवादा स्थित मॉडर्न शैक्षणिक समूह द्वारा संचालित त्रिवेणी कालेज आफ एजुकेशन तथा माडर्न कालेज आफ एजुकेशन कुन्ती नगर नवादा में बी.एड. सत्र 2026–28 के उद्घाटन समारोह का आयोजन गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। समारोह में शिक्षाविदों, शिक्षकों, प्रबंधन के पदाधिकारियों तथा नवप्रवेशित बी.एड. विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नए सत्र में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों का स्वागत करने के साथ-साथ उन्हें शिक्षक-प्रशिक्षण के महत्व, जिम्मेदारियों तथा शैक्षणिक मूल्यों से परिचित कराना था।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मॉडर्न शैक्षणिक समूह के सचिव, एसोसिएशन ऑफ पटना बिहार के महासचिव तथा एस.ए. विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार उपस्थित रहे। तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. के. नलिन शास्त्री,पूर्वसंकायाध्क्ष ,विभागाध्क्ष कुलसचिव मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, बिहार ने समारोह की शोभा बढ़ाई। अतिथियों का महाविद्यालय परिवार की ओर से स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं त्रिवेणी कॉलेज की छात्रा ,प्रमिला कुमारी, अंजलि कुमारी, जुली कुमारी, सोनाली कुमारी, रिचा कुमारी, निशा कुमारी, प्रीति कुमारी और पीयूषराज , पवन कुमार राजीवकुमार बीरेन्द्र कुमार, एवं मॉडर्न कॉलेज ऑफ एजुकेशन की छात्रा पूजा कुमारी काजल कुमारी निभा कुमारी, और राजकुमार प्रिंस कुमार अमित कुमार संतोष कुमार के मृदुल स्वर में मां सरस्वती की वंदना के साथ किया गया। इसके पश्चात महाविद्यालय के पदाधिकारियों एवं शिक्षकों ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। नवप्रवेशित विद्यार्थियों में भी कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।मुख्य अतिथि डॉ. शैलेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक केवल विषय का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि बी.एड. का प्रशिक्षण केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने या डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं होना चाहिए। शिक्षक-प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को अनुशासन, नैतिकता, संवेदनशीलता, संचार-कौशल, तकनीकी दक्षता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे गुणों का विकास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। डिजिटल तकनीक, नई शिक्षण विधियों और बदलती सामाजिक आवश्यकताओं के अनुरूप भावी शिक्षकों को स्वयं को तैयार करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, शिक्षण-अभ्यास और रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।विशिष्ट अतिथि डॉ. के. नलिन शास्त्री ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र की भावी पीढ़ी के निर्माता होते हैं। इसलिए शिक्षक-प्रशिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि ऐसे शिक्षकों का निर्माण करना है जो विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ संस्कार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवीय संवेदना और लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास कर सकें।उन्होंने कहा कि एक सफल शिक्षक वही है जो विद्यार्थियों की व्यक्तिगत क्षमताओं और आवश्यकताओं को समझते हुए उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करे। उन्होंने बी.एड. के विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने प्रशिक्षण काल को गंभीरता से लें और विद्यालयी शिक्षण के व्यावहारिक पक्ष को समझने का निरंतर प्रयास करें।समारोह में त्रिवेणी कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्राचार्य डॉ राम नरेश मॉडर्न कॉलेज ऑफ एजुकेशन के विभागाध्यक्ष श्री देवकांत साहू सहित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े पदाधिकारी एवं शिक्षाविद उपस्थित रहे। त्रिवेणी कॉलेज ऑफ एजुकेशन के विभागाध्यक्ष डॉ फिरंगी यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि बी.एड. सत्र 2026–28 के विद्यार्थियों के लिए महाविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षक-प्रशिक्षण, नियमित कक्षाएं, शिक्षण-अभ्यास, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां तथा आधुनिक शिक्षण तकनीकों के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों से महाविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने तथा अनुशासन का पालन करने का आह्वान किया।
समारोह के दौरान अतिथियों ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक सत्र की शुभकामनाएं दीं। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक की भूमिका पहले की अपेक्षा और अधिक व्यापक हो गई है। शिक्षक को केवल पाठ्यपुस्तक तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन,सृजनात्मकता, समस्या-समाधान क्षमता और सामाजिक चेतना विकसित करनी होगी।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। महाविद्यालय के शिक्षकों ने बी.एड. पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण की प्रक्रिया, शिक्षण-अभ्यास, आंतरिक मूल्यांकन तथा महाविद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में विद्यार्थियों को आवश्यक जानकारी दी।समारोह के अंत में उपस्थित अतिथियों, प्रबंधन, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया। सभी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षक-शिक्षा के माध्यम से सक्षम, संवेदनशील और जिम्मेदार शिक्षकों के निर्माण का संकल्प लिया।इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार ने कहा कि बी.एड. सत्र 2026–28 केवल एक नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत नहीं, बल्कि भविष्य के शिक्षकों के निर्माण की एक महत्वपूर्ण यात्रा का शुभारंभ है। इस शुभ अवसर पर सहायक प्राध्यापक श्री रामप्यारे यादव, जुली कुमारी एवं सभी कार्यालय कर्मचारीगण उपस्थित रहे ।समारोह कासमापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।










