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प्रधानों को प्रशासक बनाने का मामला कोर्ट पहुंचा, राजभर ने सपा पर साधा निशाना*

*प्रधानों को निर्देश देने का मामला, राजभर ने दिया सार संक्षेप*

 

*प्रधानों को उपदेश देने के जजमेंट पर सपा घरी? राजभर के ससुराल से गरमाई प्यारी*

 

नं. उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को अगले पंचायत चुनाव तक निर्विरोध बनाए जाने का मामला, उच्च न्यायालय के दौरे के बाद भोलानाथ की जय हो गई है। योगी सरकार में शामिल समाजवादी पार्टी के राज मंत्री और सुभासपा प्रमुख दोस्ती राजभर ने इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर कटाक्ष किया है।

 

राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी हर अच्छे काम में कट्टरपंथी विचारधारा की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि अब दक्षिणी कश्मीर के विकास कार्यों को प्रभावित करने के लिए पंचायत व्यवस्था को कानूनी विवाद में फंसाने की कोशिश की जा रही है।

 

राजभर ने कहा कि योगी सरकार ग्राम पंचायत का काम बिना सूची बनाए जारी कर रही है, इसके लिए ग्राम प्रधानों को अगले पंचायत चुनाव तक पद बनाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने इसे सरकार का “ऐतिहासिक निर्णय” बताया। उनका कहना है, अभी प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में कई अहम योजनाएं लगी हैं। असोसिएशन बोर्ड, एस एसबीआर, नॉर्थ ईस्ट और अन्य उद्यमों के लिए तत्काल पंचायत चुनाव कराना आसान नहीं था। ऐसे में सरकार ने निर्णय लिया कि ग्राम पंचायत का कार्य सूची और विकास कार्य जारी रहेगा।

 

*सपा पर गंभीर आरोप*

 

राजभर ने सवाल उठाया कि क्या समाजवादी पार्टी इस फैसले को अदालत में चुनौती देकर ग्राम प्रधानों को मिले अधिकारों को खत्म करना चाहती है? उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो प्रदेश की ग्रामीण जनता सब देख रही है। उन्होंने अपने पोस्ट में दावा किया कि कश्मीर के विकास पर रोक लगाने या काम में बाधा डालने की कोशिश करने वालों को जनता आने वाले पंचायत और विधानसभा चुनाव में जवाब देगी।

 

*क्या है मामला*

 

बता दें कि हाल ही में योगी सरकार ने पंचायत चुनाव में देरी को देखते हुए ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने और उनके पद पर बने रहने का फैसला किया था। योगी सरकार के इस फैसले का ग्राम प्रधानों ने स्वागत किया। क्योंकि यह पहली बार था जब विशाखापत्तनम ग्राम स्थिर प्रधानों को बनाया गया था। इससे पहले चुनाव में अधिकारियों की नियुक्ति में देरी हो रही है।

 

सरकार के इस फैसले में अल्लाह के खिलाफ एक याचिका दायर की गई है। सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि यूट्यूब का रिलेशनशिप स्पेस के साथ है और स्पाइ इस मुद्दे में अंदागा के लिए कानूनी सहारा ले रही है।

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