उम्र और सीमाओं को मात: मेरठ की अनामिका ने जीते दो स्वर्ण, 11 साल के बेटे ने निभाई ‘कोच’ की भूमिका
मेरठ:
“उम्र सिर्फ एक संख्या है और हौसले की कोई सीमा नहीं होती।” इस कहावत को मेरठ की 40 वर्षीय अनामिका मोहता और उनके 11 साल के बेटे आरव मोहता ने सच कर दिखाया है। जिला बैडमिंटन टूर्नामेंट में महिलाओं के 35 और 40 आयु वर्ग में दो स्वर्ण पदक (Gold Medals) जीतकर अनामिका ने साबित कर दिया कि यदि दिल में लगन हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है।
इस ऐतिहासिक कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा और प्रेरणादायक हाथ उनके पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे आरव का है, जिसने एक कोच, फिटनेस ट्रेनर और मार्गदर्शक तीनों की भूमिका बेहद शानदार तरीके से निभाई।
जब एकेडमी ने लौटाया, तब बेटे ने थामा रैकेट
अनामिका मोहता ने महज 7-8 महीने पहले ही बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। व्यवस्थित और पेशेवर अभ्यास के लिए जब उन्होंने शहर की कुछ अकादमियों का रुख किया, तो वहां उन्हें निराशा हाथ लगी। उम्र अधिक होने और अकादमियों में मुख्य रूप से बच्चों के अभ्यास करने के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिला। कई जगहों पर तो यहां तक कह दिया गया कि ‘मदर्स आर नॉट अलाउड’ (माताओं के लिए अनुमति नहीं है)।
हार मानने के बजाय, इस चुनौती ने उनके 11 वर्षीय बेटे आरव को प्रेरित किया। पिछले 5-6 महीनों से आरव ने अपनी मां के निजी कोच की कमान संभाल ली।
कड़ी ट्रेनिंग: आरव रोजाना सुबह मां को कोर्ट पर दौड़ते हैं, उनके फुटवर्क (Footwork) और कोर्ट कवरेज पर बारीकी से काम कराते हैं।
अनुशासित डाइट: फिटनेस को सर्वोपरि रखते हुए आरव ने घर से जंक फूड, समोसा, कचौड़ी और पूरी जैसी चीजें पूरी तरह बंद करवा दीं।
मानसिक संबल: कोर्ट पर एक सख्त कोच और घर पर एक प्रेरणास्रोत बनकर आरव ने मां की हर कमज़ोरी को उनकी ताकत में बदल दिया।
परिवार का संबल और अगला बड़ा लक्ष्य
माधवपुरम स्थित शटल आई एरीना में अभ्यास करने वाली अनामिका के परिवार का पूरा सहयोग इस सफलता के पीछे रहा है। उनके पति गौरव मोहता (संचालक, अकॉर्ड कम्युनिकेशन) और उनके सास-ससुर हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे।
राज्य स्तर पर चमकने की तैयारी:
जिला बैडमिंटन संघ के सचिव राजेश चौधरी ने अनामिका के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनका खेल बेहद शानदार रहा है। संघ अब उन्हें प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता के लिए तैयार कर रहा है, जो 2 से 5 सितंबर तक मेरठ में आयोजित की जाएगी। इस महाकुंभ में 700 से अधिक खिलाड़ी अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। वहीं, अनामिका अब एक ऐसे पेशेवर कोच की तलाश में हैं, जो मां-बेटे दोनों की इस जोड़ी को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण दे सके, क्योंकि आरव खुद भी अंडर-9 वर्ग के एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं।
प्ररेणा की मिसाल:
अनामिका और आरव की यह कहानी हर उस मां के लिए एक संदेश है जो अपने सपनों को परिवार की जिम्मेदारियों के तले दबा देती हैं, और हर उस बच्चे के लिए प्रेरणा है जो अपने माता-पिता के सपनों को उड़ान देने के लिए मजबूत सहारा बन सकता है। जब बेटा मां के सपनों के पीछे दीवार बनकर खड़ा हो जाए, तो सफलता का इतिहास लिखा जाना तय है।










