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जंतर-मंतर का रण और राहुल गांधी की गिरफ्तारी: सोशल मीडिया के तीखे तेवर से लेकर दिल्ली की सड़कों पर हाई-वोल्टेज सियासी संग्राम

जंतर-मंतर का रण और राहुल गांधी की गिरफ्तारी: सोशल मीडिया के तीखे तेवर से लेकर दिल्ली की सड़कों पर हाई-वोल्टेज सियासी संग्राम

​दिल्ली का जंतर-मंतर और प्रधानमंत्री आवास का इलाका इस समय देश की राजनीति का सबसे बड़ा एपीसेंटर (केंद्र) बन चुका है। नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक, शिक्षा के व्यापारीकरण, आसमान छूती फीस और देश के युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ ने छात्रों के भीतर बरसों से सुलग रहे गुस्से को एक विस्फोटक जनआंदोलन में बदल दिया है।

​इसी सुलगते हुए और संवेदनशील घटनाक्रम के बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को प्रधानमंत्री आवास (लोक कल्याण मार्ग) के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिया जाना (डिटेन किया जाना) इस पूरे राजनीतिक संघर्ष को एक बेहद आक्रामक और निर्णायक मोड़ पर ले आया है।

​ट्विटर (X) पर राहुल गांधी का आक्रामक वार: “झूठ और हिंसा इस सरकार के मूल सिद्धांत”

​आंदोलन की शुरुआत से ही राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (X) पर अपनी पैनी नजर रखी और अपनी पोस्ट्स के जरिए सरकार की चूलें हिला दीं। उनके डिजिटल बयानों ने इस आंदोलन को और अधिक धार दी:

​सरकार के चरित्र पर सीधा सवाल: राहुल गांधी ने एक्स पर तल्ख टिप्पणी करते हुए लिखा कि देश के युवाओं और छात्रों के हक की आवाज को दबाने वाली इस सरकार के मूल सिद्धांत “झूठ और हिंसा” बन चुके हैं।

​छात्रों पर बर्बरता का विरोध: जंतर-मंतर और दिल्ली की सड़कों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवा अभ्यर्थियों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल पर तीखा रोष जताते हुए उन्होंने लिखा— “हमने प्रधानमंत्री आवास के बाहर मार्च कर देश के युवाओं पर हो रही इस बर्बरता का कड़ा जवाब मांगा है। देश के करोड़ों छात्रों का भविष्य उजाड़ने वालों को न तो बख्शा जाएगा और न ही यह अन्याय सहन किया जाएगा।”

​सड़क से संसद तक आर-पार की लड़ाई: राहुल गांधी ने अपने ट्विटर संदेश के माध्यम से ऐलान कर दिया कि विपक्ष इस मुद्दे को आसानी से दफन नहीं होने देगा। उन्होंने साफ किया कि छात्रों के सम्मान और रोजगार की इस लड़ाई को सड़क से लेकर संसद के पटल तक पूरी ताकत और बुलंदी के साथ लड़ा जाएगा।

​जंतर-मंतर से पीएम आवास तक: गिरफ्तारी और हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामा

​यह पूरा मामला तब अपने चरम पर पहुंचा जब राहुल गांधी ने सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर सीधे जमीन पर उतरने का फैसला किया।

​अस्पताल में घायलों से मुलाकात: पुलिस कार्रवाई में घायल हुए छात्रों और युवाओं का हाल जानने के लिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सीधे आरएमएल (RML) अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने छात्रों का दर्द बांटा और सरकार की निर्ममता की कड़ी निंदा की।

​पीएम आवास के बाहर घेराव और तीखी मांगें: अस्पताल से निकलने के बाद राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं का काफिला सीधे प्रधानमंत्री आवास के बाहर जा पहुंचा। वहां उन्होंने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग की। साथ ही, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरी विफलता के लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

​पुलिस का कड़ा एक्शन और गिरफ्तारी: प्रधानमंत्री आवास के हाई-सिक्योरिटी जोन के बाहर जब नेताओं ने हटने से इनकार कर दिया और धरने पर बैठ गए, तो दिल्ली पुलिस ने आक्रामक रुख अपनाते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और उनके साथ मौजूद अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं को बलपूर्वक हिरासत में ले लिया। पुलिस उन्हें बसों में भरकर किसी अज्ञात सुरक्षित स्थान या स्टेडियम ले गई, ताकि प्रदर्शन को तितर-बितर किया जा सके

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