बाबा साहेब अंबेडकर जयंती पर सर्वोदय नर्सिंग होम की 25वीं वर्षगांठ

14 नवंबर को भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती एवं सर्वोदय नर्सिंग होम की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. राजेश द्वारा बाबा साहेब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने से हुई। इस अवसर पर उपस्थित डॉक्टरों एवं गणमान्य लोगों को सम्मानित भी किया गया।
डॉ. राजेश ने अपने संबोधन में कहा कि मानव सेवा से बड़ा कोई धर्म और सेवा नहीं है। उन्होंने प्रदेशवासियों को बाबा साहेब की जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डॉ. अंबेडकर मानव आजादी के प्रेरणास्त्रोत, वंचितों के मसीहा, बुद्ध के ज्ञान के प्रतीक, नारी उद्धारक, समाज सुधारक और भारतीय संविधान के महान शिल्पकार थे। उन्होंने उन्हें निडर, निर्भीक, धैर्यवान, कानून के ज्ञाता और वर्तमान व भविष्य की आवाज बताया।
डॉ. राजेश ने बाबा साहेब के विचारों पर प्रकाश डालते हुए उनके प्रसिद्ध कथनों का उल्लेख किया—
“मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाए।”
“शिक्षा वो हथियार है जिससे इंसान अपनी किस्मत नहीं, पूरी पीढ़ियों का भविष्य बदल सकता है।”
उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर का मानना था कि समाज की असली उन्नति सर्व समाज की समान भागीदारी और शिक्षा से होती है। बाबा साहेब के लिए शिक्षा केवल डिग्री नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, बराबरी का अधिकार और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की शक्ति थी।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि डॉ. अंबेडकर ने महाड़ सत्याग्रह के माध्यम से पानी का अधिकार दिलाया, पूना पैक्ट के जरिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कराया तथा संविधान में छुआछूत को अपराध घोषित करवाया। उनका संदेश था— “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।”
इस अवसर पर डॉ. पीयूष जायसवाल, मनोज गोड, डॉ. अनुराग, एच.आई. खान, डॉ. हीमांशु राय, ज्योति, डॉ. माउभवाथ, मास्टर प्रहलाद कुमार, कालय जीभल, गीता कुमारी, रागिनी सरोज एवं मास्टर गोरेलाल चौधरी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समारोह के अंत में सभी ने बाबा साहेब के बताए मार्ग पर चलने तथा शिक्षा, समानता और मानव सेवा के संकल्प को दोहराया।










