लखनऊ में निजी स्कूलों पर डीएम विशाख की बड़ी कार्रवाई, भदोही में भी छोड़ चुके हैं संवेदनशील प्रशासनिक छवि
विशेष रिपोर्ट | संवाददाता प्रिंस गुप्ता भदोही खास रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की राजधानी
लखनऊ में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ जिला प्रशासन ने ऐसा सख्त कदम उठाया है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। फीस वृद्धि, जबरन किताबें और कॉपियां तय दुकानों से खरीदवाने तथा शुल्क नियामक कानून की अनदेखी जैसे मामलों पर प्रशासन ने कठोर रुख अपनाते हुए 8 प्रतिष्ठित निजी स्कूलों पर कार्रवाई की है। जिलाधिकारी विशाख जी की अध्यक्षता में हुई जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक में इन स्कूलों की गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई, जिसके बाद सभी संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।

यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक निर्णय भर नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता स्थापित करने की दिशा में बड़ा संदेश माना जा रहा है। लंबे समय से अभिभावकों की शिकायत थी कि निजी स्कूल शिक्षा को सेवा नहीं, बल्कि व्यवसाय की तरह संचालित कर रहे हैं। बच्चों के अभिभावकों पर विशेष दुकानों से किताबें, कॉपियां और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाया जाता था, जिससे आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था।
प्रदेश सरकार पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार कहीं से भी किताबें खरीद सकते हैं। इसके बावजूद कई स्कूलों द्वारा नियमों की अनदेखी की जा रही थी। प्रशासन की जांच में ऐसे मामलों की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई सामने आई।
प्रशासनिक सख्ती के साथ संवेदनशील छवि
जिलाधिकारी विशाख जी की पहचान एक सख्त लेकिन संवेदनशील अधिकारी के रूप में रही है। भदोही में जिलाधिकारी के रूप में तैनाती के दौरान भी उन्होंने आम जनता से सीधे संवाद, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी थी। भदोही के लोगों के बीच आज भी उनकी कार्यशैली की चर्चा होती है। जिले में विकास कार्यों की निगरानी हो या कानून-व्यवस्था के मुद्दे, उन्होंने प्रशासन को जमीन से जोड़कर काम करने की कोशिश की थी।
भदोही में अपने कार्यकाल के दौरान विशाख जी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व संबंधी मामलों में कई प्रभावी पहल की थीं। आम लोगों की समस्याएं सुनने के लिए नियमित जनसुनवाई और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की उनकी कार्यशैली ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया। यही कारण है कि लखनऊ में निजी स्कूलों पर हुई इस कार्रवाई को भदोही के लोग भी गंभीर प्रशासनिक इच्छाशक्ति के रूप में देख रहे हैं।
अभिभावकों में राहत, स्कूलों में हलचल
लखनऊ प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अभिभावकों में राहत का माहौल है। लोगों का कहना है कि पहली बार ऐसा महसूस हो रहा है कि प्रशासन निजी स्कूलों की मनमानी पर वास्तव में अंकुश लगाने के लिए गंभीर है। दूसरी ओर निजी स्कूल प्रबंधन में इस कार्रवाई के बाद हलचल तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह शुल्क नियामक कानून का सख्ती से पालन कराया गया तो प्रदेश के अन्य जिलों में भी निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लग सकेगी। यह कदम केवल जुर्माना लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और अभिभावकों के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
प्रदेशभर के स्कूलों के लिए बड़ा संदेश
लखनऊ प्रशासन की कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा के नाम पर आर्थिक शोषण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों के उल्लंघन पर प्रशासनिक कार्रवाई तय है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में प्रदेश के अन्य जिलों में भी निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली की समीक्षा तेज हो सकती है।
शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और अभिभावक हितैषी बनाने की दिशा में उठाया गया यह कदम अब पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुका है।










