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शंकराचार्य के खिलाफ षडयंत्र का ‘सुपर फ्लॉप’ शो! , आखिर क्यों 12 मार्च को अदालत का सामना करने से भागा आशुतोष ब्रह्मचारी!

शंकराचार्य के खिलाफ षडयंत्र का ‘सुपर फ्लॉप’ शो! गायब हुए शिकायतकर्ता, आखिर क्यों 12 मार्च को अदालत का सामना करने से भागा आशुतोष ब्रह्मचारी!

उत्तर प्रदेश (इंद्र यादव) प्रयागराज। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। जहाँ एक ओर आरोप लगाने वाले आशुतोष महाराज (ब्रह्मचारी) ने अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए समय माँगा था, वहीं तय तारीख 12 मार्च को भी उनकी अनुपस्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कानूनी जानकारों और संतों के एक बड़े वर्ग का मानना है कि यह केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि सनातन धर्म के सर्वोच्च पद को धूमिल करने का एक गहरा ‘षडयंत्र’ हो सकता है।

तारीख पर तारीख: आखिर सबूत कहाँ हैं!

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि आशुतोष महाराज 12 मार्च तक अपने साक्ष्य और लिखित जवाब दाखिल करें। लेकिन ऐन मौके पर ‘सुरक्षा’ का बहाना बनाकर कोर्ट से दूरी बना लेना, मामले की गंभीरता पर सवालिया निशान लगाता है।
दावा: शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें धमकियां मिल रही हैं और उन पर हमला हुआ है।
हकीकत: प्रशासन और पुलिस की ओर से किसी भी जानलेवा हमले की पुष्टि या सुरक्षा में जानबूझकर ढिलाई के ठोस प्रमाण पेश नहीं किए गए हैं।
सवाल: क्या ‘अज्ञात स्थान’ पर रहने की बात केवल अदालत की कार्रवाई को लंबा खींचने और मीडिया ट्रायल चलाने की एक रणनीति है!

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिली अंतरिम राहत!

बता दें कि 27 फरवरी को हाईकोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी। अदालत का यह रुख दर्शाता है कि प्रथम दृष्टया आरोपों में वह मजबूती नहीं दिखी, जो तत्काल कार्रवाई के लिए जरूरी होती है। अब जब शिकायतकर्ता जवाब देने से बच रहा है, तो यह संदेह और गहरा गया है कि क्या यह पूरा मामला केवल छवि खराब करने के इरादे से रचा गया था!
साजिश का पर्दाफाश या न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग?
आशुतोष ब्रह्मचारी के इस रवैये पर अब सोशल मीडिया और प्रयागराज के गलियारों में चर्चा तेज है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सच्चे हैं, तो सबूत पेश करने में हिचकिचाहट क्यों? सुरक्षा की मांग करना अधिकार है, लेकिन इसे ढाल बनाकर न्यायिक प्रक्रिया में देरी करना ‘षडयंत्र’ की बू देता है।
अब सबकी नजरें अदालत के अगले कदम पर हैं। क्या कोर्ट आशुतोष महाराज को आखिरी मौका देगी, या फिर इस मामले को ‘आधारहीन’ मानकर खारिज कर दिया जाएगा!

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