
मुंबई (इंद्र यादव) मायानगरी में साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे पुलिस बनकर लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं। ताज़ा मामला भांडुप (वेस्ट) का है, जहाँ एक रिटायर्ड BEST कर्मचारी, दीपक मोंडकर, एक बेहद शातिराना ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटाले का शिकार हो गए। ठगों ने उन्हें डरा-धमकाकर उनके बैंक खाते से ₹39.6 लाख उड़ा लिए।

कैसे बुना गया ठगी का जाल?!
इस सनसनीखेज लूट की पटकथा किसी सस्पेंस फिल्म जैसी है!
नकली पुलिस और मनी लॉन्ड्रिंग का डर: जालसाजों ने मोंडकर को फोन किया और खुद को पुलिस अधिकारी बताया। उन्होंने दावा किया कि उनके नाम से जारी एक सिम कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करने) जैसी गंभीर आपराधिक गतिविधियों में किया गया है।
डिजिटल अरेस्ट का ड्रामा: पीड़ित को डराने के लिए स्कैमर्स ने उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दी। उन्हें घंटों तक वीडियो कॉल पर रखा गया और किसी को भी इस बारे में बताने से मना किया गया।
गोपनीय जानकारी की चोरी: गिरफ्तारी के डर से घबराए मोंडकर से जालसाजों ने उनके बैंक विवरण और व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद, कई किस्तों में कुल ₹39.6 लाख पार कर दिए गए।
एक्शन में साइबर पुलिस!
होश आने पर जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने पुलिस का रुख किया। ईस्ट साइबर पुलिस ने इस मामले में पांच अज्ञात संदिग्धों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। पुलिस अब उन बैंक खातों को ट्रेस कर रही है जिनमें पैसा ट्रांसफर किया गया था।
सावधान रहें: पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी वीडियो कॉल पर ‘गिरफ्तारी’ नहीं करती और न ही आपसे आपके बैंक की गोपनीय जानकारी मांगती है। अगर कोई आपको फोन पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दे, तो तुरंत फोन काटें और 1930 पर कॉल करें।







